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Problem of unemployment

बेरोजगारी की समस्या एक अभिशाप की तरह युवाओं के दिलों दिमाग को खोखला कर रही है। युवाओं के सामने सिर्फ यही सवाल है कि पढ़ाई के बाद नौकरी कैसे हासिल की जाए? इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO)के अनुमान के मुताबिक भारत में 2018 की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत थी। भारत के लिए यह चिंता का विषय है। देश में 77% रोजगार असुरक्षित बने रहेंगे।

1-2 दशकों में सर्विस सेक्टर में खासकर भारत में अधिक तादाद में रोजगार सृजित हुए रोजगार के मामले में असंगठित क्षेत्रों और सुरक्षित रोजगार का दबदबा है। असुरक्षित रोजगार में स्वरोजगार या परिवार द्वारा चलाए जा रहे प्रतिष्ठान में काम करना भी शामिल है। ऐसे लोगों के लिए बेहतर कामकाजी सुरक्षा की कमी रहती है। आईएलओ (ILO)के डाटा के  मुताबिक दुनिया में इस साल 1.4 अरब लोग असुरक्षित रोजगार की श्रेणी में हैं। इनमें से अकेले भारत में 39.4 करोड़ यानी एक चौथाई से ज्यादा लोग हैं। 

मोदी सरकार के रोजगार के दावे और जमीनी हकीकत
मोदी सरकार तमाम क्षेत्रों में रोजगार दावे कर रही है, लेकिन इन दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी दर 20 वर्षों में सबसे अधिक हो गई है। बेरोजगारी बढ़ने के सामने दो ही वजह सामने आई हैं। पहली नौकरी के सृजन की रफ्तार धीमी है और दूसरी इंडस्ट्री में कार्यबल मैन पावर में कटौती। वैसे तो बेरोजगारी की चपेट में पूरा देश है, लेकिन देश के उत्तरी राज्य से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश आदि सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 

अगर देखा जाए तो अपराध बढ़ने का प्रमुख कारण बेरोजगारी ही है। कुछ युवा वर्ग बेरोजगारी के अभाव के कारण अपना कदम अपराध की ओर बढ़ा लेते हैं। हालांकि उनका यह कदम पूरी तरह गलत होता है। देश में राजनीतिक दल सरकार तो बनाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उनके वादे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। रोजगार के लिए सरकार द्वारा प्रयास नहीं किया जाता जो करना चाहिए। हालांकि हम पूरी तरह नहीं कह सकते कि सरकार रोजगार देने का प्रयास नहीं कर रही है

बेरोजगारी की स्थिति को देखते हुए नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और लूटमारी के षडयंत्र के मामले में भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इस जाल में युवा वर्ग फंस जाता है और नौकरी के नाम पर ठग मनमाना पैसा युवाओं से लूटकर रफूचक्कर हो जाते हैं। कुछ बेरोजगार युवा पढ़-लिखकर सोशल नेटवर्किंग के द्वारा लोगों को नौकरी के नाम पर लूट रहे हैं। नौकरी के नाम पर लूटने वाले युवा अपराधियों का शिकार मुझे खुद होना पड़ा। 

कुछ दिन पहले एक बड़ी कंपनी के नाम पर एक एचआर ने मुझे कॉल किया और कहा कि आपका बायोडाटा शॉर्टलिस्टेड हुआ है यदि आप जॉब करना चाहते हैं तो 1250 रुपए सिक्योरिटी मनी के तौर पर जमा करा  दें। यही नहीं उसने कहा कि यदि आप तैयार हैं तो मैं आपका फोन से एक इंटरव्यू करा देती हूं।

जैसे ही मैंने हां बोला कुछ समय बाद किसी दूसरी लड़की का फोन आया और सुपरवाइजर पोस्ट के लिए इंटरव्यू लेने की बात की। तकरीबन 20 मिनट की बातचीत में उसने मेरा इंटरव्यू लिया। कुछ समय बाद पुनः दूसरे नंबर पर फोन आया जिसमें मुझे बताया गया कि इंटरव्यू में मैं सिलेक्ट हो गया हूं लिहाजा आप अपनी सिक्योरिटी मनी जमा करा दें। खास बात यह रही कि लड़की ने विशाल सिंह नाम के युवक का पंजाब बैंक अकाउंट नंबर दिया और कहा कि ट्रेनिंग के बाद पैसा रिफंड हो जाएगा। 

सारी बात होने के बाद जब उसकी आईडी मांगी तो उसने कहा यह कंपनी की पॉलिसी नहीं है हम अपनी आईडी नहीं दिखाते। ज्यादा बात करना मैंने उचित नहीं समझा क्योंकि जानता था कि वह एक फर्जी कॉल थी। लेकिन सवाल यह है कि भला इतने के बाद भी कौन बेरोजगार युवा विश्वास नहीं करेगा। 

क्यों हो रही है नौकरी के नाम पर लूटमारी?  
कुछ इस तरह के लोग नौकरी के नाम पर लोगों से पैसा लूटकर बैठे हुए हैं और शासन उनका कुछ नहीं कर पा रहा। हालांकि इस पर लगाम कसने की कोशिश की जा रही है, लेकिन बेरोजगारी का आलम ऐसा है कि युवा कुछ भी करने को तैयार है। एमबीए एमएससी जैसी बड़ी डिग्रियां हासिल कर चुके युवा राजस्थान अलवर में स्थित कृषि विभाग के चपरासी के पद के लिए आवेदन किया था।

दरअसल, यह कोई किसी एक राज्य की स्थिति नहीं है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी देखा गया कि पीएचडी बीटेक डिग्री वाले भी विधानसभा सचिवालय में चपरासी पद के लिए 368 पोस्ट के लिए 23 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। ठेकेदारी प्रथा से रोजगार सुलभ तो हो जाता है लेकिन मनमानी इस कदर है कि रोजगार के नाम पर युवाओं का शोषण किया जा रहा है। सरकारी नियमानुसार मिलने वाली राशि या कहें की सैलरी का हिसाब कुछ अलग ही होता है। निर्धारित किया गया कलेकटर रेट सिर्फ फाइलों में ही पूरा होता है। 

बेरोजगारी की ऐसी स्थिति  को देखने के बाद केंद्र सरकार पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो जाते हैं कि कहां गई वह व्यवस्थाएं जो चुनाव के समय स्वरोजगार योजना देने एवं सरकार युवाओं के हित की बात करती थी वह असफल दिखाई देती है। बहरहाल, अब चूंकि मोदी सरकर दोबारा सत्ता में है तो एक बार पुनः मोदी सरकार ने अपने बजट में बेरोजगारी से लड़ने के लिए दिया विजन केंद्र सरकार ने अपनी अंतिम बजट में  शामिल किया है। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार भविष्य में बेरोजगारी की समस्या से लड़ने के लिए कोई नई नीति पर काम करे। 
बेरोजगारी से लोगों के अंदर नशे की लत पड़ती है।


आज वर्तमान समय में इस संकट की घड़ी में संत रामपाल जी महाराज अनुयाई जरूरतमंद लोगों को तथा बेरोजगारों को राशन सामग्री उपलब्ध करवाते हैं। संत रामपाल जी महाराज के अनुयाई हर समय बेरोजगारों तथा जरूरतमंदों को राशन सामग्री तथा उनको विश्राम करने के लिए जगह देते हैं, यह लोग संकट की घड़ी में दूसरों की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। अनुयायियों ने कई मजदूरों को रहने की व्यवस्था तथा भोजन भंडारे की भी व्यवस्था करवाई।

अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल शाम 7:30 बजे..


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